एक तरफ पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कहर है तो वहीं अमेरिका कोरोना से लड़ने के साथ-साथ हिंसक प्रदर्शनों के दौर से भी गुजरना  पड़ रहा  है। एक अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद अमेरिका में लगातार धरने-प्रदर्शन हो रहे हैं, यह प्रदर्शन अब हिंसक भी हो गया है । हालात ये हैं कि राजधानी वॉशिंगटन समेत 40 शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

ये घटना 25 मई की हैं जब अमेरिकी पुलिस ने अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड को गिरफ्तार किया और कैब से उतारकर जमीन पर लिटाकर घुटनों से उसकी गर्दन को दबाया, जिससे उसकी मौत हो गई। उसके बाद में इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद से पूरे अमेरिका में धरने-प्रदर्शन शुरू हो गए।

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सोर्स : गूगल

आइए अब हम आपको बताते हैं, क्या हैं मामला जिससे जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद पुरे अमेरिका मैं दंगे हो रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, जॉर्ज पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने 20 डॉलर के फर्जी नोट के जरिए एक दुकान से खरीदारी की कोशिश की। आगे पुलिस बताया था कि जॉर्ज ने गिरफ्तारी का शारीरिक रूप से विरोध किया, इसके बाद बल प्रयोग किया गया।

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बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह 46 साल के अश्वेत नागरिक अफ्रीकी अमेरिकी समुदाय का था। उत्तरी कैरोलीना में पैदा हुआ जॉर्ज फ्लॉयड ह्यूस्टन में रहता था, लेकिन काम के सिलसिले में वह मिनियापोलिस आ गया। जॉर्ज मिनियापोलिस के एक रेस्त्रां में सिक्योरिटी गार्ड का काम करता था और उसी रेस्त्रां के मालिक के घर पर किराया देकर पांच साल से रहता था। जॉर्ज की एक छह साल की बेटी है जो अपनी मां के साथ ह्यूस्टन में रहती है। जॉर्ज को ‘बिग फ्लॉयड’ के नाम से जाना जाता था।

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हिरासत के दिन जारी हुए वीडियो में उसे एक श्वेत पुलिस अधिकारी डेरेक शोविन ने गिरफ्तार किया था। जॉर्ज के गले को घुटने से दबाने वाले पुलिस अधिकारी पर थर्ड डिग्री मर्डर का आरोप लगाया गया है।