जैसा की आप जानते ही है की किसान पिछले कई दिनों से दिल्ली की कई सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे है। ऐसे में किसान आंदोलन कर रहे लोगो के बीच अब अनबन का दौर शुरू हो चूका है। जहां पहले सभी मिल कर सरकार के फैसले का विरोध करते नजर आ रहे थे अब वही लोग एक दूसरे के फैसले से नाखुश भी नजर आ रहे है।

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चिल्ला बॉर्डर पर धरना प्रदर्शन कर रहे किशानो के बीच तकरार का माहौल नजर आया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह के नॉएडा से दिल्ली जाने वाला रास्ता खोले जाने वाले फैसले से नाराज होकर भारतीय किसान यूनियन (भानु) के राष्ट्रीय महासचिव महेंद्र सिंह चौरोली, राष्ट्रीय प्रवक्ता सतीश चौधरी समेत एक महिला किसान नेता ने इस रविवार को अपना इस्तीफा दे दिया। किसान आंदोलन के चलते यह दूसरी बार हुआ है की जब आंदोलन कर रहे लोग आपस में एक दूसरे के फैसले से सहमत नजर नहीं आये।  इससे पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष के दिल्ली से आने वाला रास्ता खोलने के फैसले से आहत हुए संगठन के प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप सिंह धरने से उठ कर अपने साथियो के साथ लौट गए थे। हालांकि इस खबर के मीडिया के सामने बेपर्दा होते ही दूसरे ही दिन वह फिर से अपने साथियो के साथ आंदोलन में शामिल हो गए थे।

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किशानो का प्रदर्शन पिछले 20 दिनों से जारी है। इसके मद्देनदर सिंघु बॉर्डर पर रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। किशानो ने कृषि कानून को रद्द करवाने के लिए अपनी पूरी जान लगा दी है। धरने पर बैठे किसान इस कड़कती ठण्ड में सड़को पर उतरे हुए है। कई किसान अनशन इस आस पर बैठे है की जल्द ही सरकार उनकी मांगो को पूरा करेगी। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा की सरकार किशानो से कृषि कानून से जुड़े हर मुद्दे पर बात करने के लिए राज़ी है। सरकार ने जो किया है वह किशानो के हित के लिए है और ऐसे में पूरा कानून को हटाना कोई समाधान नहीं है।

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सूत्रों के मुताबित यह खबर भी आयी है की गुजरात दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कच्छ में सिख किसानों से मुलाकात करेंगे और इस मुलाकात के जरिये वह सिख किशानो को अपना संदेश देंगे।