मुंबई सपनो की नगरी, यहाँ पर लोग बड़े बड़े सपने लेकर आते हैं, कुछ लोगो के सपने पुरे हो जाते हैं और कुछ सिर्फ संघर्ष करते रह जाते हैं.हर कोई बॉलीवुड मैं काम करना चाहते हैं,अक्सर हम देखते बोलीवूड मैं हर दिन कोई नया चेहरा सामने आ जाता हैं, लेकिन इसके पीछे कड़ा संघर्ष छिपा होता हैं.

आज हम बात करेंगे मुक्केबाज एक्टर विनीत कुमार के संघर्ष के बारे मैं, छोटे – छोटे रोले करने के बाद ” मुक्केबाज ” और नेटफ्लिक्स सीरीज ” बेताल ” जो आज ही रिलीज़ हुयी हैं. एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया की कैसे एक एक्टर बनने के लिये अजीबो-ग़रीब रोल निभाये. किसी फ़िल्म में उन्होंने भूत का रोल अदा किया, तो किसी फ़िल्म में वो लाश बन कर नज़र आये. वो ऐसे रोल इसी उम्मीद से करते थे कि न जाने कब कौन सा रोल उन्हें बड़ी भूमिका दिला दे.

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सोर्स : गूगल

पीटीआई को दिये इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि एक अच्छा अभिनेता बनने के लिए सबसे ज्यादा जरुरी हैं काम का मिलना, जैसे की हम सबने उन्हें बोहत छोटे छोटे किरदारों मैं देखा हैं, उन्होंने बताया की कैसे लंबे समय तक उनके पास कोई काम नहीं था. जिसकी वजह से उन्होंने ऐसे किरदार निभाये. विनीत कुमार कहते हैं कि उन्होंने बहुत सी ऐसी भूमिकाएं की हैं, जहां वो सिर्फ़ बैकग्राउंड में खड़े हुए हैं. इसी उम्मीद में कि अगली बार शायद जब वो इन लोगों के साथ काम करें, तो सीन में कोई लाइन बोलने को मिल जाए.

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उन्होंने बताया कि एक अच्छा और बड़ा अभिनेता बनने के लिए उन्होंने हर काम के लिये हां कहा, ताकि वो शहर में टिके रहें. एक समय ऐसा भी था जब विनीत कुमार के पास खाने और रहने के लिये पैसा नहीं था. हांलाकि, बाद में इन्हीं बुरे और उतार-चढ़ाव भरे अनुभवों ने उन्हें अभिनेता बनाने में मदद की. सपनों को पूरा करने निकले विनीत कुमार ने बताया कि उन्होंने दो दशक तक हार नहीं मानी.

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कड़ी मेहनत के बाद उन्हें अनुराग कश्यप की फ़िल्म ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ में दानिश का रोल मिला. इसके बाद 2018 में उन्होंने ‘मुक्काबाज़’,”गोल्ड”,”सांड की आँख” से लोगों का दिल जीत लिया. और कुछ समय पहले वो वेबसीरीज़ ‘बार्ड ऑफ़ ब्लड’ में अहम किरदार निभाते हुए नज़र आये थे.और अब वे फिर एक नै वेब सीरीज “बेताल ” के साथ हैं जिसे खुद शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस ने प्रोडूस किया हैं , विनीत कुमार की कहानी से यही साबित होता है, सपने अगर सच्चे हों तो पूरे ज़रूर होते हैं.