भारत में श्रमिकों के लिए सुरक्षा हमेशा से चिंता जनक रही हैं। यह स्वच्छता, कारखानों, कंस्ट्रक्शन वर्क या किसी अन्य ब्लू-कॉलर की नौकरी हो, ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें लापरवाही के कारण मजदूरों की मौत हुई है या गंभीर रूप से घायल हुए हैं और उनकी सुरक्षा के वहां पर खास कोई इंतजाम नहीं होते।

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सोर्स : गूगल

इसी तरह का एक उदाहरण तेलंगाना के निजामपुर में हुआ, जहां स्थानीय बिजली विभाग के एक अनुबंध कर्मचारी ने बिना किसी गियर के बिजली की लाइन में फंसी एक पेड़ की डाली को हटाने के लिए खुद को हाई-टेंशन तारों पर संतुलित कर लिया।

यह खतरनाक काम एक नूर नामक युवक ने किया था, जो बिजली के खंभे पर चढ़ गया और फिर बिना किसी डर के वह उन हाइटेँशन तारो पर रेंगते हुए गया और फिर उसने वह पेड़ की डाली को वह हटाया और फिर उसी तरह वापस रेंगता हुए वह नीचे आ गया। भले वह सही सलामत निचे आ गया पर हमारी सर्कार और काम करने वाले लोगो इन जैसे लाखो लोगो की सुरक्षा के लिए सही कदम उठाने चाहिए।

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श्रम कानूनों और मानदंडों के अनुसार, नूर द्वाराकिया गया ये खतरनाक कार्य के लिए एक हेलमेट, रबर के दस्ताने, दोहन या सुरक्षा रस्सियों का प्रावधान होना चाहिए। यह उदाहरण साबित करता है कि सुरक्षा उपायों की बात करने पर भारत कैसे पिछड़ रहा है।