हमारे देश मैं अब लॉकडाउन-4 लागु हो गया हैं, और कोरोना के नए मामले आ ही रहे हैं, तो इससे एक बात तो साबित हो गई हैं, लॉकडाउन इसका कोई सलूशन नहीं हैं। जब तक कोई टिका या दवा नहीं बन जाती हैं तब तक हम कोई भी कोरोना से अछूता नहीं हैं, पुरे दुनिया मैं कोरोना के टिका और दवा के लिए रिसर्च किया जा रहा हैं और उम्मीद की जा रही थी की जल्द ही कोई ना कोई कंपनी और दुनिया इसे बनाने मैं सफल हो जाएगी।

इस बीच एनवाई टाइम्स के अनुसार, मैसाचुसेट्स स्थित बायोटेक कंपनी, मॉडर्न ने पुष्टि की है कि उनके टीके mRNA-1273 के चरण 1 में 8 लोगों (18-55 वर्ष की आयु) मैं प्रयोग किये गए थे जिसके आशाजनक परिणाम दिखाई दिए हैं। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने निर्माता को 600 लोगों के साथ मानव परीक्षण के चरण 2 को शुरू करने के लिए हरी झंडी दे दी है। और एक बहोत अच्छी खबर हैं हम सब लोगो के लिए।

सीएनएन की रिपोर्ट है कि यह कंपनी अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के साथ मिलकर काम कर रही है और इससे वैक्सीन को उपलब्ध कराया जा सकता है, बशर्ते भविष्य मैं अगर अच्छे परिणाम आने भी जरुरी हैं।

द इंडियन एक्सप्रेस ने सीईओ स्टीफ़ेन बैंसेल के हवाले से कहा, “यह एक बहुत अच्छा संकेत है कि हम एक ऐसा एंटीबॉडी बनाते हैं जो वायरस को दोबारा बनने से रोक सकता है।

चरण 1 में, स्वस्थ स्वयंसेवकों के रक्त के नमूनों की जांच की गई थी कि क्या वैक्सीन एंटीबॉडी बनाने में मदद करती है, चरण 3 में हजारों रोगी शामिल होंगे, अनिवार्य रूप से वायरस के खिलाफ वास्तविक परीक्षा होगी। यह जुलाई में शुरू होने की उम्मीद है। मॉडर्ना के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ताल ज़क्स का मानना ​​है कि यदि सब ठीक हो जाता है, तो वैक्सीन 2020 या 2021 के अंत तक उपलब्ध होगी।

हम भी उम्मीद करते ये की इसका सफल परीक्षण हो जाये और ये सभी के लिए उपलब्ध हो