लगता हैं,भारत और नेपाल के बीच चल रहा नक्शा विवाद जल्द ख़तम होने वाला हैं नहीं हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि नेपाल की सरकार ने तीन भारतीय हिस्सों को अपना बताकर संशोधन बिल को नेपाली संसद में पेश कर दिया। इससे पहले प्रस्ताव पर बीते दिनों नेपाल की सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए थे।

ताज़ा खबरों के अनुसार, अब नेपाल ने उत्तराखंड में भारतीय क्षेत्र कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा पर दावा करते हुए अपने देश में इसे जोड़कर नया नक्शा जारी कर दिया हैं और साथ ही अब इसे संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए संसद में पेश कर दिया गया है।

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इसपर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई थी। नेपाल के नक्शा जारी करने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने नेपाल को भारतीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने को कहा था। नॉर्मली देखा जाये तो, नेपाली संसद को संविधान संशोधन विधेयक पारित करने में एक महीने का समय लगता है, लेकिन लोगों की मांगों को देखते हुए नेपाली संसद अगले 10 दिनों में इसे पारित करने के लिए कई प्रक्रियाओं को दरकिनार कर सकती है।

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इससे पहले भारत ने इस कदम को ‘एकतरफा’ बताया था और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है । विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था:

प्रादेशिक दावों की ऐसी कृत्रिम वृद्धि भारत द्वारा स्वीकार नहीं की जाएगी … नेपाल इस मामले पर भारत की सुसंगत स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ है और हम नेपाल सरकार से आग्रह करते हैं कि इस तरह के अनुचित कार्टोग्राफिक दावे से बचना चाहिए और भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए।

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दरसअल, नेपाल ने उस क्षेत्र पर दावा किया है, जो ब्रिटिश काल के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ हुई एक संधि के तहत, चीन के साथ सीमा साझा करता है।