पीएम मोदी ने कल आर्थिक पैकेज की घोषणा की, जैसे की पहले भी भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय ने कुछ फैसले किये थे उनको भी इसी मैं शामिल किया गया हैं। और ये पैकेज भारत के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 10%, यानि 20 लाख करोड़ रुपये का होगा।

बस यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह बहुत बड़ी राशि है, 20 लाख करोड़ में 13 शून्य हैं।

सोर्स : गूगल

ये पैकेज इसलिए भी बड़ा हो जाता है, इसे पहले अमेरिका द्वारा घोषित वित्तीय पैकेज दुनिया में सबसे बड़ा है, जो कि अमेरिका के जीडीपी का 13% है, और फिर जापान ने अपनी जीडीपी का 21% था।

20 लाख करोड़ अगर यानि अमेरिकन $ 266 बिलियन होगा , यह राशि वियतनाम, पुर्तगाल, ग्रीस, न्यूजीलैंड और रोमानिया जैसे 149 देशों की जीडीपी से अधिक है। यह लगभग 284 बिलियन डॉलर की पाकिस्तान की वार्षिक जीडीपी के बराबर है।

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इस परिप्रेक्ष्य में, 2019 में पूरे वर्ष के लिए भारत का रक्षा बजट 4 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा अधिक था। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के अनुसार, भारत अपने पूरे बजट का लगभग 4.6% शिक्षा पर खर्च करता है।

हाँ यह एक अफसोस की बात है, भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद का महज 1.15% स्वास्थ्य सेवा पर खर्च करता है। जो की थोड़ा चौकाने वाली बात है।

केंद्र सरकार संकट से निपटने के लिए जेफ बेजोस की पूरी संपत्ति का दोगुना से अधिक खर्च करेगी। यह बिल गेट्स के मूल्य के 3 गुना से भी अधिक है और मुकेश अंबानी की कीमत से लगभग 5 गुना अधिक है।

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इससे पहले पिछले महीने, कांग्रेस ने एक आरटीआई का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि सरकार ने 2014 से सितंबर 2019 तक 6.66 लाख करोड़ रुपये के बकाएदारों के ऋण माफ किए थे।

इस पैकेज पर सरकार जितनी राशि खर्च करेगी, वह उससे तीन गुना अधिक है!

अगर आप देखे तो इसका एक बड़ा हिस्सा (लगभग 8.04 लाख करोड़ रुपये), भारतीय रिजर्व बैंक ने फरवरी, मार्च और अप्रैल में विभिन्न उपायों के माध्यम से सिस्टम में इंजेक्ट किया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा इस वर्ष की शुरुआत में 27 मार्च को घोषित किये गए 1.7 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय पैकेज को भी इसी मैं जोड़ा और अभी का आर्थिक पैकेज वास्तव में 10.26 लाख करोड़ रुपये है।

हम आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हम आपको अधिक जानकारी देंगे।